Friday, July 22, 2011

जंक फूड से बढ़ सकता है फैट


यूं तो मोटापा के विभिन्न कारणों में जंक फूड को पहला नंबर प्राप्त है लेकिन हाल ही में की गई एक स्टडी में रिसर्च कर्ताओं ने पता लगाया है कि दरअसल जंक फूड वजन को कंट्रोल करने वाली हमारी ब्रेन सेल्स को मार डालता है। इसके बाद पता नहीं चलता कि आपने कितना खाया है। 

ऐसे में हम ज्यादा खाने लगते हैं और फिर हमारा वजन तेजी से बढ़ने लगता है। लीड रिसर्चर डॉ. जोसा थेलर ने बताया कि जंक फूड खाने से दिमाग में मौजूद उन सेल्स को नुकसान पहुंचता है, जो वजन को कंट्रोल करती हैं। 

साइंटिस्ट अब यह भी पता करने की कोशिश कर रहे हैं कि नॉर्मल मोटापे में भी ऐसा ही कुछ होता है क्या ?

Thursday, July 21, 2011

रोहित शेट्टी का नया फंडा ‘सिंहम’

बड़ी- बड़ी हास्य फिल्में बनाने वाले फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी ने इस बार अपनी एक्शन फिल्म ‘सिंहम’ के साथ दर्शकों के दिलों में जगह बनाने का नया फंडा अपनाया है।


खूंखार शिकारी

उनकी फिल्म ‘सिंहम’ का नाम तमिल में इसी नाम से बनी फिल्म का हिंदी रीमेक है। लेकिन रोहित का कहना है कि उनकी यह फिल्म तमिल फिल्म से पूरी तरह अलग है। उन्होंने मूल फिल्म की पटकथा में 70 प्रतिशत बदलाव करते हुए यह फिल्म बनाई है। रोहित ने कहा कि गोलमाल फिल्म की शूटिंग करते हुए तमिल फिल्म सिंहम देखी और उन्हें यह फिल्म काफी पसंद आई। इसके बाद उन्होंने सिंहम का हिन्दी रीमेक बनाने का निर्णय लिया। इस फिल्म में रोहित के प्रिय अभिनेता और मित्र अजय देवगन मुख्य भूमिका में हैं।

नासा ने की चौथे चांद की खोज

अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने घोषणा की है कि खगोलविदों ने बर्फीले बौने ग्रह प्लूटो का चक्कर लगाते एक चौथे चांद की खोज की है।

इस छोटे से नए उपग्रह को अस्थायी तौर पर पी4 नाम दिया गया है। हबल अंतरिक्ष टेलीस्कोप से प्लूटो के चारों ओर बने छल्लों की खोज की जा रही थी और इसी दौरान इस नए उपग्रह के सम्बंध में पता चला। पी4 को सबसे पहले हबल के वाइड फील्ड कैमरा 3 से 28 जून को ली गई एक तस्वीर में देखा गया था। इसके बाद तीन जुलाई और 18 जुलाई को हबल से ली गई अन्य तस्वीरों में इसकी पुष्टि हुई।

यह प्लूटो का चक्कर लगाने वाला अब तक का सबसे छोटा चंद्रमा है। इसका अनुमानित व्यास 13 से 34 किलोमीटर तक है। दूसरी ओर प्लूटो के सबसे बड़े चांद, कैरान का व्यास 1,043 किलोमीटर है। अन्य दो चांदों, निक्स व हाइड्रा का व्यास क्रमशः 32 किलोमीटर व 113 किलोमीटर है।

इस कार्यक्रम से जुड़े कैलीफोर्निया के एसईटीआई संस्थान के मार्क शोवाल्टर का कहना है कि मुझे यह बहुत असाधारण लगा कि हबल के कैमरों से हम इतने सूक्ष्म उपग्रह को तीन अरब मील (या पांच अरब किलोमीटर) से भी लंबी दूरी पर इतनी स्पष्टता के साथ देख सके।

पी4, निक्स व हाइड्रा की कक्षाओं के बीच स्थित है। निक्स व हाइड्रा को 2005 में हबल के जरिए ही खोजा गया था। अमेरिकी नौसेना वेधशाला ने 1978 में कैरान को खोजा था। साल 1990 में हबल के इस्तेमाल से यह स्पष्ट हुआ कि यह प्लूटो से अलग उपग्रह है।

Wednesday, July 20, 2011

मेडिटेशन और योगा दिलो-दिमाग को रखता है तरोताजा

स्ट्रेस कह वजह से हम अपने जीवन में बहुत सी ऐसी गलतियां कर जाते हैं जिसका नुकसान हमें जिंदगीभर उठाना पड़ता है। हॉलिवुड एक्टे्स जेनिफर एनेसिटन ने हाल ही में उजागर किया कि मेडिटेशन और योगा उनके दिलो-दिमाग को काफी खुश रखते हैं। इससे आपका स्ट्रेस लेवल भी कम होता है।

अगर आप डेली रूटीन में मेडिटेशन को शामिल कर लें, तो इसके कई फायदे होंगे। जेनिफर आगे कहती हैं कि जब मेरा ब्रेकअप हुआ था उन दिनों भी मैं मेडीटेशन के कारण खुश रहती थी और काफी उर्जावान महसूस करती थी।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि वहीं, रोजाना कुछ मिनट तक मेडिटेशन करने से आपका दिमाग भी काफी कूल रहता है। इससे ना सिर्फ आपकी एंग्जाइटी का लेवल कम होता है, बल्कि जीवन में गलतियां होने की संभावना भी कम होती है। आपको एक नई एनर्जी मिलती है।

Saturday, July 16, 2011

इबादत, तिलावत और सखावत की रात

मुस्लिम कैलेण्डर के मुताबिक शाबान माह की 14 तारीख (रविवार, 17 जुलाई) को शब-ए-बरात का त्योहार मनाया जा रहा है । इबादत, तिलावत और सखावत (दान-पुण्य) के इस त्योहार के लिए मस्जिदों और कब्रिस्तानों में खास सजावट की जाएगी। रविवार की रात मनाए जाने वाले शब-ए-बरात के त्योहार पर कब्रिस्तानों में भीड़ का आलम रहेगा। 

मान्यता है कि पूरे साल किए गए कर्मों का लेखा-जोखा तैयार करने और आने वाले साल की तकदीर तय करने वाली इस रात को शब-ए-बरात कहा जाता है। इस रात को पूरी तरह इबादत में गुजारने की परंपरा है। नमाज, तिलावत-ए-कुरआन, कब्रिस्तान की जियारत और हैसियत के मुताबिक खैरात करना इस रात के अहम काम है। मालवा-निमाड़ में इस त्योहार पर तरह-तरह के स्वादिष्ट मिष्ठानों पर दिलाई जाने वाली फातेहा के साथ मनाया जाता है। 

मुस्लिम धर्मावलंबियों के प्रमुख पर्व शब-ए- बरात के मौके पर मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में शानदार सजावट होगी तथा जल्से का एहतेमाम किया जाएगा। रात्रि में मुस्लिम इलाकों में शब-ए-बरात की भरपूर रौनक होगी। शब-ए-बरात की रात शहर में कई स्थानों पर जलसों का आयोजन किया जाएगा। 

इस्लामी मान्यता के मुताबिक शब-ए-बरात की सारी रात इबादत और तिलावत का दौर चलता है। साथ ही इस रात मुस्लिम धर्मावलंबी अपने उन परिजनों, जो दुनिया से रूखसत हो चुके हैं, की मग़फिरत (मोक्ष) की दुआएं करने के लिए कब्रिस्तान भी जाते हैं। इस रात दान का भी खास महत्व बताया गया है।

Thursday, March 3, 2011

गुमसुम है जिंदगी, थोड़ा हंस ले तो क्या जाता है,
चुप हर खुशी में उदासी के पहरे हैं,
गाते हुए जी ले गुनगुनाते हुए जी लें,
गुमसुम है जिंदगी, थोड़ा हंस ले तो क्या जाता है,
सपनों की वादी में ख्वाब सुनहरे है,
हर लम्हे को हसीं बनाते हुए जी लें,
गुमसुम है जिंदगी, थोड़ा हंस ले तो क्या जाता है,
हर मौसम में बदले कई चेहरे हैं,
एक-एक खामी भुलाते हुए जी लें,
गुमसुम है जिंदगी, थोड़ा हंस ले तो क्या जाता है,

Thursday, February 3, 2011

नासा ने की पृथ्वी जैसे ग्रहों की खोज

नासा का कहना है कि खोजे गए नए ग्रहों में से कुछ में जीवन होने की संभावनाएं हैं। अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का कहना है कि उसने कई सौ नए ग्रह सुदूर सौरमंडल में पाए हैं। इनमें से पाँच तो पृथ्वी के आकार के हैं और इनमें जीवन की संभावना हो सकती है। इस खोज से ग्रहों की संख्या में और बढोत्तरी हो सकती है, हालांकि नासा ने कहा है कि वो अपनी इस खोज की अभी और पुष्टि करने की कोशिश कर रहा है।


नासा का कहना है कि नए ग्रहों में छह ग्रह एक तारे के इर्दगिर्द स्थित हैं और ये पृथ्वी से दो हज़ार प्रकाश वर्ष की दूरी पर हैं। ग़ौरतलब है कि एक प्रकाश वर्ष वह दूरी है जो कि प्रकाश निर्वात में एक वर्ष में तय करता है। ये दूरी मापने की एक इकाई है जिसे मुख्यत लंबी दूरियों जैसे दो नक्षत्रों के बीच की दूरी या इसी प्रकार की अन्य खगोलीय दूरियों को मापने में प्रयोग किया जाता है।


अहम खोज
वैज्ञानिकों का कहना है कि ये अब तक किसी सौर मंडल में पाए गए ग्रहों की सबसे बड़ी संख्या है। उल्लेखनीय है कि हाल में नासा के वैज्ञानिकों ने सौरमंडल के बाहर स्थित सबसे छोटे ग्रह की खोज की थी।
वैज्ञानिकों का कहना है कि चट्टानों से भरा ये ग्रह काफ़ी कुछ पृथ्वी की ही तरह लगता है लेकिन इस पर किसी तरह का जीवन होने की संभावना नहीं है। इस ग्रह पर जीवन की संभावना इसलिए नहीं है क्योंकि ये अपने सूर्य के इतने क़रीब है कि इसका तापमान हज़ार डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है।


लेकिन शोधकर्ता मानते हैं कि केपलर-10बी की खोज पृथ्वी जैसे किसी ग्रह की खोज की राह में एक ‘मील का पत्थर’ है। इस ग्रह को केपलर-10 बी का नाम दिया गया है। ये उस टेलीस्कोप का नाम है जिसने इसकी खोज की है।